बच्चों की छिपी हुई क्षमताओं को जागृत करने और उनके मानसिक एवं बौद्धिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आर्ट ऑफ लिविंग बांसवाड़ा चैप्टर की ओर से 'इंट्यूशन प्रोसेस' का सफल आयोजन किया गया। शहर की साईं कृपा वाटिका में आयोजित इस विशेष कार्यशाला में बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।
आर्ट ऑफ लिविंग के मीडिया प्रभारी सुभाष मेहता ने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग की इंट्यूशन प्रोसेस टीचर विनीता जोशी ने इस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पद्धति के माध्यम से बच्चों की अंतःप्रेरणा को जागृत किया इससे बच्चों में अद्भुत क्षमताएं विकसित हुई जिससे वे अपनी सामान्य बौद्धिक सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य करने में सक्षम हो रहे हैं।
जोशी ने बताया कि इस प्रक्रिया के नियमित अभ्यास से बच्चों में असाधारण बदलाव देखने को मिलते हैं और बच्चे आंखों पर पट्टी बांधकर भी रंगों, आकृतियों और लिखे हुए शब्दों को आसानी से महसूस और पहचान लेते हैं। इसके अलावा, बच्चों की एकाग्रता इतनी मजबूत होती है कि वे पढ़ाई और अन्य सहगामी गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने लगते हैं। यह कोर्स बच्चों के मन से परीक्षा के दबाव, भविष्य के डर और झिझक को पूरी तरह दूर कर उन्हें मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वास से परिपूर्ण बनाता है। इसके सकारात्मक प्रभाव से बच्चों की निर्णय लेने की क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है, जिससे वे जीवन की हर परिस्थिति में सही और गलत का सहज आकलन कर पाने में सक्षम बनते हैं।
आज के इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और स्क्रीन-ओरिएंटेड दौर में बच्चों का मानसिक संतुलन और शांति बनाए रखना अभिभावकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे समय में आर्ट ऑफ लिविंग का यह कोर्स बच्चों के मस्तिष्क के तार्किक और रचनात्मक दोनों हिस्सों को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। ध्यान और प्राणायाम के जरिए बच्चे कम उम्र से ही मानसिक रूप से शांत, ऊर्जावान और सकारात्मक मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।
आयोजकों का मानना है कि इंट्यूशन प्रोसेस बच्चों को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि जीवन के हर पड़ाव पर एक आत्मविश्वासी, मानसिक रूप से सुदृढ़ और सक्षम नागरिक बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है। कार्यशाला के समापन पर उपस्थित अभिभावकों ने इस अनूठी पहल की सराहना की और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इसे बेहद उपयोगी बताया
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